शब्द और अनुभव – जीवन और जीवन का सार

शब्द और अनुभव – जीवन और जीवन का सार

जीवन सम्भावनाओं का आश्रय हैं । जीवन मे हम कई तरह के कार्य करते है एवं अनुभव प्राप्त करते हैं । पर जीवन मे दो बातें मेरे दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण हैं । पहला हमारे मुख द्वारा बोले गए शब्द एवं मुख – मण्डल द्वारा प्रदर्शित भाव और दूसरा जीवन मे हमारे द्वारा किए कार्यो से प्राप्त अनुभव की पोटली ।

 

अगर हम बोले गए शब्दों जी बात करे तो वह केवल शब्द ही नही बल्कि हमारे द्वारा जीवन रूपी बागीचे में बोया गया बीज हैं , जिससे नवोदभिद पौधें निकालकर हमारे जीवन को पुलकित एवं आनन्दित करते हैं । हमारे शब्द ही हमारे जीवन की खेती हैं । हमारे शब्द ही पाप – पुण्य एवं कर्मो की रूप – रेखा का निर्धारण करते हैं । हमारे शब्द रूपी वचन कहीं किसी को आनन्दित करते हैं , पुलकित करते हैं , उन्हें हमारी ओर आकर्षित करते हैं तो कहीं पर वही शब्द शत्रु रूपी बीज का निर्धारण करते हैं , मन में क्रूरता , ईर्ष्या एवं दुराचारिता को जन्म देते हैं । यही शब्द हमारे कर्म बनते हैं , हमारे भाग्य बनते हैं ।

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अगर हम इससे आगे की बात करे तो शब्द रूपी बीज से बना कर्म रूपी वृक्ष हमारे जीवन रूपी बगीचे को आच्छादित करते हैं एवं इस जीवन में अनुभव रूपी फल प्रदान करते हैं । जीवन मे हम बहुत कुछ प्राप्त करते हैं व खोते हैं परन्तु एक वस्तु जो सर्वदा हनारे पास रहती हैं, वह है जीवन मे क्षण – प्रतिक्षण हुए बदलावों से प्राप्त अनुभव की पोटली । अब हम इस अनुभव को जीवन मे किस प्रकार प्रयोग करते हैं , यह उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करता हैं । पर अगर उस अनुभव से किसी योग्य एवं जरूरतमंद का पथ – प्रदर्शन कर सके तो उससे बड़ा जीवन का योगदान कुछ भी नहीं हैं इस संसार के लिए । यही जीवन का सच्चा काम हैं या यूं कहें यही जीवन हैं ।

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