आदत न थी

हमें लिखने की आदत न थी , पर आपकी सोहबत ने हमें लिखना सिखा दिया || 1 || हमें यू इशारों में बात करने की आदत न थी ,  पर आपकी नजरों ने हमें इशारों में बात करना सिखा दिया || 2 ||  हमें इस तरह बोलने की आदत न थी , पर आपके नगमों ने मेरे लब्जों को थिरकना सिखा दिया  || 3 ||

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छेड़ गया कोई !

सपनों में आकर  ,  मेरे ख़्वाबों को छेड़ गया कोई , मुस्कुराहटों पर मेरी , चार चाँद लगा गया कोई , आँखों में मेरी ,  नशीली प्यास जगा गया कोई , साँसों से ,  साँसों की खुश्बू को बढ़ा गया कोई ,

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जवानी

जवानी  कदम बहकने लगे जब राहों में ,  नैंन शर्माने लगे जब आईने में , शोखियाँ आने लगे जब बातों में , तो समझो जवानी ने चिट्ठी डाली  || 1 || हर आहट पर जब नजरे उठने लगे , बिना वजह जब मुस्कान नाचने लगे , मधुरता छलकने लगे जब बातों में , तो समझो जवानी ने डेरा डाला || 2 || मचलने लगे दिल जब अंगड़ाई को , तनहा होने लगे मन जब अपनों के बीच , आठों पहर सताने लगे जब बेचैनी बांहों की ,

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इतना ना मुस्कुराइए !

इतना ना मुस्कुराइए ! इस कदर इतना ना मुस्कुराइए , हम पर बिजली ना गिराइए , घायल हो जायेंगे हम , हमें घायल ना बनाइए  || 1 || इस कदर लुका - छिपी ना खेलिए , हमें इतना ना थकाइए , सपनों में खो जायेंगे हम , हमें नींद में ना सुलाइए  || 2 ||

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पढ़ना हमें आता हैं !

If you have vision of love , vision of emotion , you can catch every feeling of love one around yourself ,  so keep open your eyes as well as your vision of love ...... तुम लाख छुपाओं , अपने दिल की बातों को हमसे , पर चेहरा पढ़ना हमें आता हैं  || 1 || तुम लाख बंद करो , अपने दिल के दरवाजे को , पर दरवाजा तोड़ना हमें आता हैं  || 2 ||

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अधूरे सपनों के फूल खिलाऊँगा

Everything is possible in this world , if you want , you can ...... यादों में तेरी एक गुलिस्ताँ सजाऊँगा ,  कुछ अधूरे सपनों के बीज उसमें लगाऊँगा , हसरते तो बहुत हैं इस दिल के ,  पर सबसे पहले मैं तुम्हें अपना बनाउँगा || 1 || हर धड़कन की छाँव में इक किस्सा सजाऊँगा ,  कुछ अधूरे कहानियों के फूल उसमें लगाऊँगा ,  अरमान तो बहुत हैं इस धड़कन के ,

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पुकार

पुकार नजरें तलाशती हैं उन्हें . जिन्हें दिल भूलना चाहता हैं  || 1 || यादे आती हैं उनकी , जिनकी हस्ती को मिटाना चाहता हूँ  || 2 || कदम बढ़ जाते हैं उनके आशियाने की ओर , जिनके परछाइयों से दूर जाना चाहता हूँ || 3 ||

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‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

'चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी ' कुछ दर्द हैं होठों पर , कुछ नमी हैं आँखों में अभी , शिकवे - शिकायतों के बादलों में , 'चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी' || 1 || कुछ तरंगे  हैं मन में उठी , कुछ बेचैनी हैं धड़कन में अभी . सुख - दुःख के लहरों पर भटकती ,

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मैं भारत , अखण्ड भारत

मैं भारत , अखण्ड भारत नामक कृति 14 अगस्त 2009 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखी गयी मेरी सर्वोत्तम कृतियों में से एक है| राष्ट्र को समर्पित मेरी तरफ से छोटी सी कविता, देशभक्ति कविता,

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