क़दमों का रूख

क़दमों का रूख

जब दिल के सागर में ,

तूफ़ान उठने लगे ,

कश्ती का रूख ,

किनारों की ओर मोड़ लेना || 1 ||

जब आँखों के जाम में ,

मदिरा कम होने लगे ,

अपनी नजरों का रूख ,

तनहाईयों की ओर मोड़ लेना || 2 ||

जब सपनो की दुनियाँ में ,

अंधकार छाने लगे ,

अपने विचारों का रूख ,

पतझड़ की ओर मोड़ लेना || 3 ||

जब यादों की दुनियाँ में ,

धुंधलापन छाने लगे ,

अपने मुस्कुराहटों का रूख ,

रुसवाइयों की ओर मोड़ लेना || 4 ||

जब मायूसी भरे पलों में ,

तड़प की चिंगारी डसने लगे ,

अपने क़दमों का रुख ,

मेरे आशियाने की ओर मोड़ लेना || 5 ||

 

सपन कुमार सिंह , 18/08/2008 , सोमवार 

 

घर का पता बता जाना

  इतना ना मुस्कुराइए !

  जवानी

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