लखनिया दरी – अहरौरा

लखनिया दरी – अहरौरा

लखनिया दरी की स्थिति 

यह जलप्रपात अहरौरा नगर से लगभग 10 किमी० की दूरी पर वाराणसी से शक्तिनगर मार्ग पर स्थित हैं | लखनिया दरी काफी बड़े भू – भाग में फैला हैं , जो कि प्राकृतिक स्थलाकृतियों से परिपूर्ण हैं | यहाँ पर जलप्रपात से कुछ दूरी पर दुर्लभ जंगली जानवर भी रहते हैं , साथ ही कुछ विलुप्तप्राय वनस्पतियाँ भी मिलती हैं |

 

कैसे जाएँ 

लखनिया दरी वाराणसी कैन्ट स्टेशन से सीधे अपनी प्राइवेट वाहन द्वारा या रोडवेज या ऑटो द्वारा पहुचा जा सकता हैं | मिर्जापुर या चुनार से जाने के लिए या तो आप नारायणपुर से वाराणसी – शक्तिनगर मार्ग से मुड़ सकते हैं , या चुनार से 5 किमी० की दूरी पर जमुई नामक स्थान से जमुई – अहरौरा मार्ग द्वारा अहरौरा पहुँचकर मुख्य मार्ग द्वारा लखनिया दरी पहुच सकते हैं |

वाराणसी – शक्तिनगर मार्ग पर प्रमुख स्थान नारायनपुर , अदलहाट , अहरौरा , सुकृत , मधुपुर , राबर्ट्सगंज , सलखन , चोपन , डाला , ओबरा मोड़ , हाथीनाला , रेणुकूट , रिहन्द डैम , बीना ,  अनपरा , शक्तिनगर आदि हैं |

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विशेषता एवं आकर्षण 

लखनिया दरी स्थल पर ना केवल प्राकृतिक झरने एवं जलप्रपात हैं बल्कि आदिकालीन प्राचीन संस्कृति को संजोए हुए गुफाचित्र एवं भित्तिचित्र भी हैं | हमारे तन – मन को जहाँ एक ओर ऊँची चोटियाँ , उनसे गिरने वाले झरने तथा जंगल आनन्दित करते हैं , तो वही दूसरी ओर गुफा के संरक्षित भित्तिचित्र हमें अपनी अतीत के याद दिलाते हैं | वाराणसी के समीप स्थित होने एवं यातायात की सुगम व्यवस्था के कारण सदैव यहाँ भीड़ लगी रहती हैं , विशेषकर बरसात एवं छुट्टियों के दिनों में जैसे मानों यहाँ मेला लगा हों |

लखनिया दरी

लखनिया दरी में पानी डोंगिया बाँध से ओवरफ्लो होकर आता हैं | तीन तरफ से ऊँची पहाड़ की चोटियों से घिरा यह स्थल वास्तव में बहुत ही रमणीय हैं | यहाँ की हरियाली एवं कलकल करती झरने की ध्वनि मन को पुलकित – आनन्दित करती हैं |

लखनिया दरी की एक और विशेषता यहाँ स्थित चूना दरी हैं | चूना दरी , लखनिया दरी जलप्रपात से लगभग 3 किमी० अन्दर बीच जंगल में स्थित हैं | यहाँ पर्यटकों को जाने की पूरी मनाही हैं | चूना दरी में सालभर पानी भरा रहता हैं | वास्तव में चुना दरी कोई जलप्रपात नहीं हैं , बल्कि 500 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के कारण नीचे एक गहरा कुंड बन गया हैं | दूसरी बात यहाँ जाने के लिए कोई रास्ता नहीं हैं , यहाँ जाने के लिए दुर्गम पहाड़ की पगडंडियों से होकर जाना पड़ता हैं , जोकि बहुत ही खतरनाक हैं |

क्या करें 

यहाँ आकर आप चाहे तो पिकनिक मनाएं या घुमे – फिरे या जलक्रीड़ा कर सकते हैं | यदि आप चाहे तो यहाँ फोटोग्राफी भी कर सकते हैं |  झरने के बीच पत्थर की चट्टान पर बैठकर आप प्रकृति की सुन्दरता को महसूस कर सकते हैं | अगर आप यहाँ चाहे तो चित्रकारी भी कर सकते हैं | झरने में स्नान के बाद बाटी – चोखा , खीर – पूरी खाने का आनन्द कुछ और ही होता हैं |

समय एवं सावधानियाँ

यह स्थल सुबह से शाम पाँच बजे तक खुला रहता हैं | अत: समय से पहले आपको यहाँ से निकलने के लिए तैयार रहना चाहिए या निकल जाना चाहिए |

पहाड़ी झरनों एवं नदियों में अक्सर अचानक पानी बढ़ने का खतरा रहता हैं | जिसे थोड़ी सी सावधनी से दूर किया जा सकता हैं |

  • सबसे पहले झरने या फाल पर नहाते समय लापरवाही ना बरते |
  • पत्थरों पर होने वाले फिसलन का विशेष ध्यान रखें |
  • नशे में धुत होकर फाल के अन्दर प्रवेश ना करे , यह वर्जित हैं |
  • बारिश के समय कोशिश करे  फाल में ना नहाये क्योंकि पानी कभी भी बढ़ सकता हैं |
  • फाल पर मौजूद गहरे कुंड में जाने से बचे , इसमें अच्छे तैराक का भी बाहर निकलना मुश्किल होता हैं |
  • निर्धारित स्थल पर ही भोजन करें |
  • भोजन या पिकनिक उपरान्त उस स्थान को साफ़ करना कतई ना भूले क्योंकि अगर स्वच्छता होगी तभी आप या हम वहाँ जायेंगे अन्यथा नहीं |
  • कपड़े बदलते समय विशेष सावधानी बरते |
  • यहाँ अक्सर बरसात के समय आकाशीय बिजली गिरती हैं , जिसके लिए आपको सतर्क रहना होगा होगा |
  • बारिश के समय फाल से कुछ ऊँची स्थान पर चले जाए |

 

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