‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’ कविता मनुष्य जीवन में होने वाले उतार – चढ़ाव पर आधारित हैं | इस कविता में व्यक्ति के भावों के बारे में मैंने लिखा हैं कि ख़ुशी और गम के बीच जीवन में क्या होता हैं | इस कविता को मैंने 16 जनवरी सन 2014 को लिखा |   so feel the pain of life …..

 

 

‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी ‘

कुछ दर्द हैं होठों पर ,

कुछ नमी हैं आँखों में अभी ,

शिकवे – शिकायतों के बादलों में ,

‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’ || 1 ||

कुछ तरंगे  हैं मन में उठी ,

कुछ बेचैनी हैं धड़कन में अभी .

सुख – दुःख के लहरों पर भटकती ,

चन्द लम्हों की कश्ती अपनी  || 2 ||

कुछ उलझन हैं लब्जों पर ,

कुछ तड़पन हैं बाहों में अभी ,

दिन – रात के करवटों में भूलती ,

चन्द खुशियों की जिन्दगीं अपनी  || 3 ||

सपन के सपनों की दुनियाँ इतनी ,

उनकी मुस्कुराहटों पर थमी जिन्दगीं अपनी ,

बुझती रोशनी की आशनाई में ,

ख्वाहिशों पर फिसलती जिन्दगीं अपनी ,

‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’ || 4 ||

सपन कुमार सिंह , 16 / 01 / 2014 , गुरूवार 

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