इतना ना मुस्कुराइए !

इतना ना मुस्कुराइए ! इस कदर इतना ना मुस्कुराइए , हम पर बिजली ना गिराइए , घायल हो जायेंगे हम , हमें घायल ना बनाइए  || 1 || इस कदर लुका - छिपी ना खेलिए , हमें इतना ना थकाइए , सपनों में खो जायेंगे हम , हमें नींद में ना सुलाइए  || 2 ||

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पढ़ना हमें आता हैं !

If you have vision of love , vision of emotion , you can catch every feeling of love one around yourself ,  so keep open your eyes as well as your vision of love ...... तुम लाख छुपाओं , अपने दिल की बातों को हमसे , पर चेहरा पढ़ना हमें आता हैं  || 1 || तुम लाख बंद करो , अपने दिल के दरवाजे को , पर दरवाजा तोड़ना हमें आता हैं  || 2 ||

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अधूरे सपनों के फूल खिलाऊँगा

Everything is possible in this world , if you want , you can ...... यादों में तेरी एक गुलिस्ताँ सजाऊँगा ,  कुछ अधूरे सपनों के बीज उसमें लगाऊँगा , हसरते तो बहुत हैं इस दिल के ,  पर सबसे पहले मैं तुम्हें अपना बनाउँगा || 1 || हर धड़कन की छाँव में इक किस्सा सजाऊँगा ,  कुछ अधूरे कहानियों के फूल उसमें लगाऊँगा ,  अरमान तो बहुत हैं इस धड़कन के ,

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चुनार – एक ऐतिहासिक नगर Part 2
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चुनार – एक ऐतिहासिक नगर Part 2

बाबा बूढ़ेनाथ का मन्दिर - चुनार किले के तलहटी में स्थित टेकऊर में मुख्य मार्ग पर बाबा बूढ़ेनाथ का मंदिर हैं , जो स्थल से काफी ऊँचाई पर हैं | यहाँ भगवान् शंकर की प्रतिमा हैं | इस मंदिर से नगर के दक्षिणी व् पश्चिमी दृश्यों का अवलोकन किया जा सकता हैं | वहीँ मंदिर के नीचे सड़क के बगल में नगर के प्रबुद्धजनों के बैठने हेतु व्यवस्था हैं , जो हरियाली युक्त हैं | यहाँ हमेशा नगर के वरिष्ठ नागरिक आपको मिलेंगे | दुर्गा माँ मंदिर एवं दक्षिणेश्वर काली खोह - चुनार रेलवे स्टेशन से सटे राष्ट्रीय राजमार्ग ( NH 7 ) से राजगढ़ सम्पर्क मार्ग पर चुनार से लगभग  2  किमी० की दूरी पर एक पहाड़ी की गुफा में अतिप्राचीन माँ दुर्गा की चाँदी की प्रतिमा स्थापित हैं | इसके अलावा यहाँ भगवान शंकर का शिवलिंग , महावीर हनुमान एवं अन्य हिन्दू देवताओं की प्रतिमा स्थापित हैं | ऐसा क

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चुनार – एक ऐतिहासिक नगर Part 1
https://www.youtube.com/watch?v=pSqW5k-k-6Q

चुनार – एक ऐतिहासिक नगर Part 1

चुनार भारत के उत्तर - प्रदेश राज्य के जिला - मिर्जापुर में पवित्र गंगा नदी के किनारे पर बसा एक तहसील स्तरीय क्षेत्र हैं | जहाँ नगर पालिका परिषद्  , चुनार भी हैं | यह मिर्जापुर जिला मुख्यालय से लगभग 36 किमी० की दूरी पर  , विन्ध्याचल से लगभग 42 किमी० की दुरी पर  , वाराणसी  ( बनारस ) कैन्ट से लगभग 50 किमी० की दूरी पर तथा मुगलसराय जंक्शन ( वर्तमान में पं० दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन ) से लगभग 40 किमी० की दूरी पर स्थित हैं | चुनार क्षेत्र की समुद्र तल ऊँचाई 84 मी० या 276 फीट हैं | यहाँ का पिन कोड - 231304 हैं | चुनार , रेलवे एवं सड़क मार्ग द्वारा मुख्य नगरों मिर्जापुर , विन्ध्याचल , वाराणसी , मुगलसराय से जुड़ा हुआ हैं | चुनार जंक्शन रेलवे स्टेशन दिल्ली - हावड़ा मुख्य रेलवे मार्ग पर स्थित हैं जबकि भारत की सबसे लम्बी राष्ट्रीय राजमार्ग ( NH 7 ) , वाराणसी से कन्याकुमारी , चुनार से होकर गुजरती हैं |

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जानिए चाय के विभिन्न प्रकार एवं उन्हें बनाने के तरीके

आज के समय में सुबह बिना चाय या काँफी के नहीं होती | चाहे व्यक्ति छोटा हो या बड़ा चाय सबकी जरुरत बन चुकी है , पर चाय के विभिन्न प्रकार एवं उसे बनाने का सही तरीका बहुत कम ही लोगों को पता हैं | चाय सेहत के लिए फायदेमंद हैं पर इसका तात्पर्य यह नहीं कि हम दिनभर में कई कप चाय पी जाए | हमें एक दिन में  2 से 3

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पुकार

पुकार नजरें तलाशती हैं उन्हें . जिन्हें दिल भूलना चाहता हैं  || 1 || यादे आती हैं उनकी , जिनकी हस्ती को मिटाना चाहता हूँ  || 2 || कदम बढ़ जाते हैं उनके आशियाने की ओर , जिनके परछाइयों से दूर जाना चाहता हूँ || 3 ||

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‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

'चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी ' कुछ दर्द हैं होठों पर , कुछ नमी हैं आँखों में अभी , शिकवे - शिकायतों के बादलों में , 'चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी' || 1 || कुछ तरंगे  हैं मन में उठी , कुछ बेचैनी हैं धड़कन में अभी . सुख - दुःख के लहरों पर भटकती ,

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मैं भारत , अखण्ड भारत

मैं भारत , अखण्ड भारत नामक कृति 14 अगस्त 2009 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखी गयी मेरी सर्वोत्तम कृतियों में से एक है| राष्ट्र को समर्पित मेरी तरफ से छोटी सी कविता, देशभक्ति कविता,

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शब्द और अनुभव – जीवन और जीवन का सार

शब्द और अनुभव , जीवन सम्भावनाओं का आश्रय हैं । जीवन मे हम कई तरह के कार्य करते है एवं अनुभव प्राप्त करते हैं । पर जीवन मे दो बातें मेरे दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण हैं । अगर हम बोले गए शब्दों जी बात करे तो वह केवल शब्द ही नही बल्कि हमारे द्वारा जीवन रूपी बागीचे में बोया गया बीज हैं , जिससे नवोदभिद पौधें निकालकर हमारे जीवन

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