छेड़ गया कोई !

छेड़ गया कोई !

Also read :  चुनार – एक ऐतिहासिक नगर Part 2

Also read :  जानिए चाय के विभिन्न प्रकार एवं उन्हें बनाने के तरीके

छेड़ गया कोई !

सपनों में आकर  ,  मेरे ख़्वाबों को छेड़ गया कोई ,

मुस्कुराहटों पर मेरी , चार चाँद लगा गया कोई ,

आँखों में मेरी ,  नशीली प्यास जगा गया कोई ,

साँसों से ,  साँसों की खुश्बू को बढ़ा गया कोई ,

धड़कन में समाकर , दिल के कोरे कागज़ पर

अपना नाम लिख गया कोई  || 1 ||

सपनों में आकर , मेरे ख़्वाबों से खेल गया कोई ,

इस दिल के सूने साज को बजा गया कोई ,

मेरी आवाज में , अपना मधुर गीत सजा गया कोई ,

अपने चेहरे की चमक से , मुझे हीरा बना गया कोई ,

मैं तो सुन्दर था ही , मुझे और भी हँसी बना गया कोई ,

सपनों में आकर , मेरे ख़्वाबों को सजा गया कोई || 2 ||

Also read :   अधूरे सपनों के फूल खिलाऊँगा

Also read :  ‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

सपन कुमार सिंह, 07/02/2007, बुधवार

Leave a Reply

Close Menu