क़दमों का रूख

मोड़ लेना , जब दिल के सागर में , तूफ़ान उठने लगे , कश्ती का रूख , किनारों की ओर मोड़ लेना रुख मोड़ लेना

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मौसमी सर्दी , खाँसी व् जुकाम – बचाव के घरेलू उपाय

आज के परिवेश में ये आम बात हो गयी हैं , जब भी मौसम बदलता हैं आपको हर कोई यही कहते हुए मिलेगा कि जुकाम हो गया हैं , खाँसी हो गया हैं | पर इसका कारण शायद ही कोई बता पाये , हर व्यक्ति यही कहेगा कि मौसम में बदलाव के कारण सर्दी , खाँसी व् जुकाम हो गया | पर क्या ये सही हैं , अगर देखा जाए तो इनको बुलावा भी हमने ही दिया हैं |

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विंढमफाल – मिर्जापुर

विंढमफाल की स्थिति  विंढमफाल मिर्जापुर - राबर्ट्सगंज मुख्य मार्ग पर मिर्जापुर मुख्यालय से 15 किमी० की दूरी पर स्थित हैं | 

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ये मैनें जाना ना था !

ये मैनें जाना ना था ! My feelings tried to come out from my heart but ............................ भावनाओं का तूफ़ान इस तरह , मेरी ज़िन्दगी में आएगा , ये मैनें जाना ना था  || 1 || तूफानों की इन तेज हवाओं में , इस साहिल पर मैं अकेला रहूँगा , सिर्फ एक तिनके का सहारा होगा ,

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आदत न थी

हमें लिखने की आदत न थी , पर आपकी सोहबत ने हमें लिखना सिखा दिया || 1 || हमें यू इशारों में बात करने की आदत न थी ,  पर आपकी नजरों ने हमें इशारों में बात करना सिखा दिया || 2 ||  हमें इस तरह बोलने की आदत न थी , पर आपके नगमों ने मेरे लब्जों को थिरकना सिखा दिया  || 3 ||

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इतना ना मुस्कुराइए !

इतना ना मुस्कुराइए ! इस कदर इतना ना मुस्कुराइए , हम पर बिजली ना गिराइए , घायल हो जायेंगे हम , हमें घायल ना बनाइए  || 1 || इस कदर लुका - छिपी ना खेलिए , हमें इतना ना थकाइए , सपनों में खो जायेंगे हम , हमें नींद में ना सुलाइए  || 2 ||

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अधूरे सपनों के फूल खिलाऊँगा

Everything is possible in this world , if you want , you can ...... यादों में तेरी एक गुलिस्ताँ सजाऊँगा ,  कुछ अधूरे सपनों के बीज उसमें लगाऊँगा , हसरते तो बहुत हैं इस दिल के ,  पर सबसे पहले मैं तुम्हें अपना बनाउँगा || 1 || हर धड़कन की छाँव में इक किस्सा सजाऊँगा ,  कुछ अधूरे कहानियों के फूल उसमें लगाऊँगा ,  अरमान तो बहुत हैं इस धड़कन के ,

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पुकार

पुकार नजरें तलाशती हैं उन्हें . जिन्हें दिल भूलना चाहता हैं  || 1 || यादे आती हैं उनकी , जिनकी हस्ती को मिटाना चाहता हूँ  || 2 || कदम बढ़ जाते हैं उनके आशियाने की ओर , जिनके परछाइयों से दूर जाना चाहता हूँ || 3 ||

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‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

'चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी ' कुछ दर्द हैं होठों पर , कुछ नमी हैं आँखों में अभी , शिकवे - शिकायतों के बादलों में , 'चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी' || 1 || कुछ तरंगे  हैं मन में उठी , कुछ बेचैनी हैं धड़कन में अभी . सुख - दुःख के लहरों पर भटकती ,

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