क़दमों का रूख

मोड़ लेना , जब दिल के सागर में , तूफ़ान उठने लगे , कश्ती का रूख , किनारों की ओर मोड़ लेना रुख मोड़ लेना

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मौसमी सर्दी , खाँसी व् जुकाम – बचाव के घरेलू उपाय

आज के परिवेश में ये आम बात हो गयी हैं , जब भी मौसम बदलता हैं आपको हर कोई यही कहते हुए मिलेगा कि जुकाम हो गया हैं , खाँसी हो गया हैं | पर इसका कारण शायद ही कोई बता पाये , हर व्यक्ति यही कहेगा कि मौसम में बदलाव के कारण सर्दी , खाँसी व् जुकाम हो गया | पर क्या ये सही हैं , अगर देखा जाए तो इनको बुलावा भी हमने ही दिया हैं |

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लखनिया दरी – अहरौरा

लखनिया दरी की स्थिति  यह जलप्रपात अहरौरा नगर से लगभग 10 किमी० की दूरी पर वाराणसी से शक्तिनगर मार्ग पर स्थित हैं | लखनिया दरी काफी बड़े भू - भाग में फैला हैं , जो कि प्राकृतिक स्थलाकृतियों से परिपूर्ण हैं | यहाँ पर जलप्रपात से कुछ दूरी पर दुर्लभ जंगली जानवर भी रहते हैं , साथ ही कुछ विलुप्तप्राय वनस्पतियाँ भी मिलती हैं | कैसे जाएँ  लखनिया दरी वाराणसी कैन्ट स्टेशन से सीधे अपनी प्राइवेट वाहन द्वारा या रोडवेज या ऑटो द्वारा पहुचा जा सकता हैं | मिर्जापुर या चुनार से जाने के लिए या तो आप नारायणपुर से वाराणसी - शक्तिनगर मार्ग से मुड़ सकते हैं , या चुनार से 5 किमी० की दूरी पर जमुई नामक स्थान से जमुई - अहरौरा मार्ग

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तूफाने सफ़र ज़िन्दगी में !

Success always wins with the struggle of life and barriers are broken. this is the moral story of life and it's always true............. तूफाने सफ़र ज़िन्दगी में ! मुश्किलें और भी आएंगी , राहे सफ़र ज़िन्दगी में  | अँधेरा और भी घना होगा , मंजिले तलाश में | कोई साया भी साथ न होगा तेरे ,

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गुमनाम शहीद

गुमनाम शहीद भारत माँ के आँचल तले , सो गये ना जाने कितने गुमनाम शहीद || 1 || कितने नाम , कितने चेहरे ,कितने मासूम , कितने वीर थे , गुमनाम शहीद || 2 || जंगल - जंगल , बस्ती - बस्ती ,

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