क़दमों का रूख

मोड़ लेना , जब दिल के सागर में , तूफ़ान उठने लगे , कश्ती का रूख , किनारों की ओर मोड़ लेना रुख मोड़ लेना

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अच्छी नींद के लाभ – अच्छी नींद कैसे प्राप्त करें

आजकल के व्यस्त दिनचर्या के कार्यक्रम एवं भाग - दौड़ के कारण अक्सर नींद ना एक आम बात हो गयी हैं | हममें से अधिकांश लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते | पर इससे हमारा ही नुक्सान हैं | वैसे देखा जाएँ तो इसकी वजह भी हम ही  हैं | हम अपने काम एवं जिम्मेदारियों में इतनी खो गए हैं कि हम अपने जीवन की सबसे अमूल्य वस्तु अपने स्वास्थ्य को ही भुल गए हैं | एक अच्छी नींद हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करती हैं या रोगों को हमारे पास फटकने भी नहीं देती हैं | आइए हम सबसे पहले नींद न आने के कारणों को देखते हैं , फिर उसके दुष्प्रभाव एवं उसके बाद अच्छी नींद के उपाय को देखते हैं |

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ये मैनें जाना ना था !

ये मैनें जाना ना था ! My feelings tried to come out from my heart but ............................ भावनाओं का तूफ़ान इस तरह , मेरी ज़िन्दगी में आएगा , ये मैनें जाना ना था  || 1 || तूफानों की इन तेज हवाओं में , इस साहिल पर मैं अकेला रहूँगा , सिर्फ एक तिनके का सहारा होगा ,

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आपकी यादें

आपकी यादें याद करता हूँ आपको , तो इस धड़कते दिल को , आपकी जुदाई का एहसास होता हैं , और जुदाई में सिर्फ खामोशियाँ हैं || 1 || सोचता हूँ आपको , तो आपके साथ बिताये , वो हँसीन पल याद आते हैं , और इन खुशनुमा पलों में सिर्फ ,

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आदत न थी

हमें लिखने की आदत न थी , पर आपकी सोहबत ने हमें लिखना सिखा दिया || 1 || हमें यू इशारों में बात करने की आदत न थी ,  पर आपकी नजरों ने हमें इशारों में बात करना सिखा दिया || 2 ||  हमें इस तरह बोलने की आदत न थी , पर आपके नगमों ने मेरे लब्जों को थिरकना सिखा दिया  || 3 ||

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छेड़ गया कोई !

सपनों में आकर  ,  मेरे ख़्वाबों को छेड़ गया कोई , मुस्कुराहटों पर मेरी , चार चाँद लगा गया कोई , आँखों में मेरी ,  नशीली प्यास जगा गया कोई , साँसों से ,  साँसों की खुश्बू को बढ़ा गया कोई ,

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जवानी

जवानी  कदम बहकने लगे जब राहों में ,  नैंन शर्माने लगे जब आईने में , शोखियाँ आने लगे जब बातों में , तो समझो जवानी ने चिट्ठी डाली  || 1 || हर आहट पर जब नजरे उठने लगे , बिना वजह जब मुस्कान नाचने लगे , मधुरता छलकने लगे जब बातों में , तो समझो जवानी ने डेरा डाला || 2 || मचलने लगे दिल जब अंगड़ाई को , तनहा होने लगे मन जब अपनों के बीच , आठों पहर सताने लगे जब बेचैनी बांहों की ,

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