तुम्हें डुबा लेंगे

तुम्हें डुबा लेंगे

जब तुम मिल जाओगे ,

आँखें चार कर लेंगे |

अपने बेकाबू धड़कनों का ,

चुपके से नजराना पेश कर देंगे || 1 ||

जब आँखें मिल जाएँगी ,

नजरों से वार कर देंगे |

अपने चाँद का एक टुकड़ा ,

चुपके से तेरे दिल के कोने में रख जायेंगे || 2 ||

जब तुम पास आ जाओगे ,

खुद को भूल जायेंगे |

अपनी निर्जल सागर के धार में ,

चुपके से तुम्हें डुबा लेंगे || 3 ||

जब तुम खो जाओगे ,

खुद से रूठ जायेंगे |

अपनी धड़कती धड़कनों को ,

चुपके से मिटटी में दफ्न कर जायेंगे || 4 ||

सपन कुमार सिंह , 25/03/2008  , मंगलवार

घर का पता बता जाना

पढ़ना हमें आता हैं !

‘चन्द लम्हों की जिन्दगी अपनी’

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